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कलैयालाईभ

साहित्य

अब त……… (राम प्रसाद साह)

अब त ससुरवा ना रहबो राजा घरभरके खोबसन ना सहबो राजा एक त रतिया निदिंया ना आवे सबरे से सजिया कामवा सतावे धुन…