साहित्य

अब त……… (राम प्रसाद साह)

अब त ससुरवा ना रहबो राजा
घरभरके खोबसन ना सहबो राजा

एक त रतिया निदिंया ना आवे
सबरे से सजिया कामवा सतावे
धुन जैसन पिसाई ना सहबो राजा

अब त……………….
जेने से आवे हमके अह्रावे
तोहरे देह बाटे केहु ना बुभावे
देवरा से सब बात ना कहबो राजा
अब त ………………..

एक त पलंगिया काटे धाबे
लोरवा से सिह्रानि भिजं जाले
दरदिया के डोभ ना थहबो राजा
अब त ………………….

आधि आधि रतिया पपिहा पुकारे सुना बा सेजरिया तोाहरा बिना रे अन्तिम बा रट तोहे ना कहबो राजा
अब त…………….

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