साहित्य

कैसे कटी जिनगी हमार / भोजपुरी

कइसे कटी जिनगी हमार

दई हो का हम कइलीं तुहार कि दु:ख हमें दे

दिहल..अ…

कि सुख मोर ले लिहल… अ… अ..

चारों तरफ भईंल अन्हार

हे सिरजनहार लगा द पार कि बड़ा दु:ख दे दिहल… अ..

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